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अलीगढ़:“ लगातार बिगड़ती जीवन शैली में मैदा से निर्मित खाद्य पदार्थों, फास्ट फूड से जहां एक ओर महिलाऐं निःसंतानता की ओर अग्रसर हो रही हैं, तो दूसरी ओर तंबाकू, धूम्रपान, शराब सेबन आदि व्यसनों से पुरूष भी निःसंतानता में बराबर की भूमिका निभा रहे हैं।

” उक्त बातें वरिष्ठ आइवीएफ व स्त्रीरोग विशेषज्ञ डाॅ सुरेखा चौधरी ने शांति नर्सिंग होम में एसआरएल डायग्नोस्टिक्स द्वारा आयोजित निःसंतानता जांच शिविर में कहीं। डाॅ सुरेखा चौधरी ने 80 से अधिक महिलाओं की जांच कर निःसंतानता पर निःशुल्क सलाह प्रदान की। उन्होंने मरीजों को निःसंतानता को दूर करने की आइवीएफ तकनीकि के बारे में बताया कि “ हार्मोन असंतुलन, नलिकाओं में रुकावट या फिर शुक्राणु न होना व इनकी अपर्याप्त संख्या बांझपन के प्रमुख कारण हैं. आइवीएफ से निःसंतानता के ईलाज की आधुनिक तकनीकि है। इस तकनीक में महिला के अंडाशय से अंडे को निकालकर उसका संपर्क द्रव माध्यम में शुक्राणुओं से कराया जाता है. महिला को हार्मोन सम्बंधी इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि उसके शरीर में अधिक अंडे बनने लगें. इसके बाद अंडाणुओं को अंडकोष से निकाला जाता है और नियंत्रित वातावरण में महिला के पति के शुक्राणु से उन्हें निषेचित कराया जाता है. इसके बाद निषेचित अंडाणु को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है. 23 से 40 वर्ष के बीच की महिलाएँ इस तकनीक का उपयोग कर सकती हैं. धूम्रपान करने वाली और शराब पीने वाली महिलाओं के लिए यह तकनीक सफल नहीं होती और सफल होने पर भी गर्भपात का खतरा बना रहता है. उम्र बढ़ने के साथ आईवीएफ की सफलता दर भी कम होती जाती है. इस दौरान एसआरएल क्षेत्रीय प्रबंधक ललित शर्मा, रूपेश, चंद्रपाल व शांति नर्सिंग होम के डाॅ शुगुफ्ता जुबैरी, डाॅ कल्पना बघेल, अरीना खान, हेमा सिंह, मीना चैधरी, निधि, सोनी , डैजी आस्तिन उपस्थित थे।